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शौर्या दल

राज्य में महिलाओं के प्रति अनुकूल वातावरण निर्माण करने व उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक आँगनवाड़ी स्तर पर मूल्यांकन के आधार पर शौर्या दल का गठन किया गया है शौर्या दल का गठन एक निरन्तर प्रक्रिया होगी। इस दल ग्राम के संवेदनशील तथा जनसमुदाय में स्वीकार्यता रखने वाले महिला, पुरूष एंव युवाओं को सदस्य के रूप में चुना जाता है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं आशा कार्यकर्ता, भी इस दल की सदस्य होती हैं। यह दल पंचायत स्तर पर समुदाय को महिलाओं एवं बालिकाओं के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास, आवश्यक सहयोग तथा सहायता प्रदान करेगा। सामाजिक कुरीतियों में सुधार लाने और महिलाओं को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सक्षम बनाते हुये समता मूलक समाज निर्मित करना है। शौर्या दलों का गठन प्रत्येक आँगनवाड़ी केन्द्र स्तर पर किया जा रहा है।

शौर्या दल के लक्ष्य एवं उद्देश्य :

  • शौर्या दल महिलाओं की युगानुकूल गरिमा व देशानुकूल महिमा बनाये रखने के लिए स्वप्रेरणा, संवेदना व जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभायेंगे ।
  • परिवार व समाज के स्वास्थ्य के लिये महिला को स्वस्थ, सुरक्षित, शिक्षित, स्वावलंबी व सक्षम होना आवश्यक है। इस दिशा में शौर्या दल-प्रकृति से बेहतर तालमेल, सामाजिक परम्परा एवं विज्ञान, अधिकार व कर्तव्यों का समावेश कर महिलाओं के माध्यम से सुसंगठित, सुव्यवस्थित, मानवीय व देश प्रेम से ओतप्रोत होकर गांव व मोहल्ले का विकास करेंगे।
  • शौर्या दल का स्वरुप:

    शौर्या दल का गठन ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रो में आँगनवाड़ी स्तर पर किया जा रहा है। शौर्या दल में 10 सदस्य होंगे, इस दल में ग्राम/वार्ड के संवेदनशील तथा जनसमुदाय में स्वीकार्यता रखने वाले 5 महिला व 5 पुरूश को चुना जाता है जो प्रकृति, समाज तथा अपने गांव व मोहल्ले के लिये संवेदनशील व स्वेच्छा पूर्वक सामाजिक कार्य के लिये तत्पर हों।

    शौर्या दल के मुख्य कार्य एवं भूमिकाएं

  • किसी भी हिंसा से पीडित महिला (जैसे दहेज, हिंसा, बीमारी, लैंगिक अपराध, इत्यादि) को सहायता दिलाने के लिये उपयुक्त शासकीय अधिकारी से संम्पर्क करना, बाल विवाह न करने के लिये समाज में जागरूकता लाना।
  • “शौचालय नहीं तो शादी नहीं“ तर्ज पर घर-घर में शौचालय बनाने व उपयोग करने हेतु ग्रामीणों तथा रहवासियों को जागरूक करना ।
  • लालिमा अभियान के अंतर्गत रक्ताल्पता (एनीमिया) अर्थात शरीर में खून की कमी में सुधार लाने हेतु ग्राम स्वास्थ्य एवं पोशण दिवस (VHND) तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से समुदाय को जागरूक करना।
  • प्रत्येक परिवार में तथा सामुदायिक व सरकारी खुले स्थानों पर वृक्षारोपण, किचिन गार्डन इत्यादि में पंचवटी से पोशण के लिये सम्पूर्ण ग्राम की कार्ययोजना तैयार करना। कार्ययोजना, ग्रामवासियों, महिला एवं बाल विकास विभाग, उद्यानिकी, वन, कृषि विभाग आदि के जमीनी अमले के साथ मिलकर बनाई जाये। प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में क्रियान्वयन हेतु गतिविधियां सुनिष्चित करना। ये गतिविधियां उद्देष्यों के अनुरूप स्पष्ट व परिणाम मूलक हो, जिनके परिणामों के स्पष्ट मापक निर्धारित हो।
  • शौर्या दल कार्यों के साथ-साथ कुपोषण कम करना,एनीमिया,विटामिन सी को प्रोत्साहन,स्वच्छता,सस्टेनेबिलिटी,सेनिटरी नेपकिन,षिक्षण,पंचायती राज,सुखी परिवार,नशा मुक्ति,संवेदीकरण गतिविधियों में भी सक्रिय योगदान करेगें।

    शौर्या दल गठन :

    51 जिलों के ग्राम /वार्डो में आँगनवाडी केन्द्र स्तर पर लगभग 82204 दलों का गठन किया जा चुका है।

    प्रशिक्षण :

    महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास संस्थान अधारताल, जबलपुर के माध्यम से शौर्या दलों के सदस्यो को प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु 313 ब्लाक में प्रति ब्लाक 2 मास्टर ट्रैनर्स तैयार किये गये । जिनके माध्यम से सेक्टर लेवल पर शौर्या दलों के सदस्यों को एक दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।